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नई दिल्ली: आज के समय में भारतीय साइंटिस्ट (Indian Scientist) कमाल कर रहे हैं। चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) के सफलतापूर्वक लैंडिंग के बाद ISRO को एक और बड़ी सफलता हाथ आई है। भारत के सूर्य मिशन आदित्य एल1 (Aditya L1 Mission) में अपनी सफलता का पहला सबूत दे दिया है। आदित्य एल1 पर लगे सोलर अल्ट्रावॉयलेट इमेजिंग टेलिस्कोप (Photo voltaic Ultraviolet Imaging Telescope- SUIT) ने सूरज की पहली तस्वीर (Solar Picture By Aditya L1) ले ली है। 

200 से 400 नैनोमीटर वेवलेंथ की तस्वीरें 

दरअसल, ISRO के हाथों के बड़ी कामयाबी आई है। आदित्य एल1 पर लगे SUIT ने सूर्य की तस्वीरें कैद की हैं। जिसमें सूरज कई तरह के रंग में दिखाई दे रहा है। यह सभी तस्वीर 200 से 400 नैनोमीटर वेवलेंथ की है। इन तस्वीरों को ISRO ने अपने एक्स हैंडल पर शेयर किया है। जिसमें सूर्य काफी आकर्षक दिखाई दे रहा है। 

सूर्य की  फुल डिस्क इमेज

इसरो ने शुक्रवार (8 दिसंबर) ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर सूर्य की इन तस्वीरों को पोस्ट कर में बताया, ”सूट पेलोड ने अल्ट्रवॉयलेट वेवलेंथ्स (तरंग दैर्ध्य) के पास सूर्य की फुल डिस्क इमेज कैप्चर की हैं। तस्वीरें में 200 से 400 एनएम तक की वेवलेंथ में सूर्य की पहली फुल-डिस्क रिप्रजेंटेशन शामिल है। तस्वीरें सूर्य के फोटोस्फीयर और क्रोमोस्फीयर के जटिल विवरण प्रदान करती हैं।”

11 फिल्टरों का इस्तेमाल

इसरो ने अपने बयान में बताया कि SUIT विभिन्न वैज्ञानिक फिल्टरों का इस्तेमाल करके इस वेवलेंथ रेंज में सूर्य के फोटोस्फीयर और क्रोमोस्फीयर की फोटो को कैद करने में कामयाब हो पाया है। इतना ही नहीं बयान में यह भी बताया गया कि 20 नवंबर 2023 को सूट पेलोड चालू किया गया था। एक सफल प्री-कमीशनिंग चरण के बाद, टेलीस्कोप ने 6 दिसंबर, 2023 को अपनी पहली लाइट साइंस इमेज लीं। सूर्य की तस्वीरों को 11 अलग-अलग फिल्टर का इस्तेमाल करके लिया गया है।

sun's different photo Aditya L1 Mission
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क्या है मिशन का उद्देश्य?

जानकारी के लिए बता दें कि इसरो ने सौर वायुमंडल का अध्ययन करने के लिए 2 सितंबर को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से पोलर सैटेलाइट व्हीकल (PSLV-C57) के जरिए आदित्य एल1 मिशन को लॉन्च किया था। 

इस मिशन का उद्देश्य पृथ्वी से करीब 15 लाख किलोमीटर दूर लांग्रेज बिंदु 1 (L1) की प्रभामंडल कक्षा में स्थापित होना है। यह बिंदु स्पेस में एक ऐसे प्लेस है, जहां किसी चीज को रखने पर उन्हें वहां लंबे समय तक आसानी से रखा जा सकता है। वैज्ञानिक जोसेफ लुई लाग्रेंज के नाम पर इन प्वाइंट्स का नाम रखा गया है। सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा के सिस्टम में ऐसे पांच बिंदु हैं। L1 ऐसा बिंदु है जहां से चौबीस घंटे सूर्य पर बेरोकटोक पर नजर रख सकते हैं। 

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सूरज क्यों उगलता है आग  

दरअसल, सूरज एक तारा है, जिससे हमारे सौर मंडल को एनर्जी मिलती है। इसकी उम्र लगभग 450 करोड़ साल मानी जाती है। बिना सौर ऊर्जा के पृथ्वी पर जीवन नामुमकिन है। सूर्य की ग्रेविटी के कारण ही सौर मंडल में सभी ग्रह मौजूद है, अगर सूर्य नहीं होगा तो हर चीज़ खत्म हो जाएगी। सूरज का केंद्र यानी कोर में न्यूक्लियर फ्यूजन होता है। इसलिए सूरज चारों तरफ आग उगलता नज़र आता है। 

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क्यों जरूरी है सूर्य की स्टडी? 

सूरज की स्टडी इसलिए जरुरी है क्योंकी इसके बदौलत सौर मंडल के बाकी ग्रहों को भी अच्छे समझ जा सके। सूरज की वजह से लगातार धरती पर रेडिएशन, गर्मी, मैग्नेटिक फील्ड और चार्ज्ड पार्टिकल्स का बहाव आता है। इसी बहाव को सौर हवा या सोलर विंड कहते हैं। ये एनर्जी प्रोटोन्स से बने होते हैं, जिससे सोलर मैग्नेटिक फील्ड का पता चलता है, जो कि बेहद विस्फोटक होता है। वहीं कोरोनल मास इजेक्शन (CME) की वजह से आने वाले सौर तूफान से धरती को बहुत खतरा रहता है। इसलिए अंतरिक्ष के मौसम को जानना और समझना बहुत जरूरी है। यह मौसम सूरज की वजह से भी अच्छा और बुरा होता है। 





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