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सीमा कुमारी

नवभारत डिजिटल टीम: 15 जनवरी 2024 को ‘मकर संक्रांति’ (Makar Sankranti 2024) का पावन त्योहार पूरे देशभर में मनाया जाएगा। मकर संक्रांति के दिन कुछ जगहों पर खिचड़ी बनाने, खाने और दान करने की परंपरा है। वहीं, इस दिन काले तिल और गुड़ का दान करना भी बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। इसके अलावा देश में कुछ जगहों पर मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने की भी परंपरा है। हर घर में बच्चे-बड़े, सभी पतंग उड़ाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर मकर संक्रांति के ही दिन पतंग क्यों उड़ाई जाती है? आइए   जानें पतंग उड़ाने के पीछे की परंपरा।

‘मकर संक्रांति’ के दिन पतंग उड़ाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसके पीछे एक पौराणिक कथा छिपी हुई है। कथा के अनुसार, सबसे पहले भगवान श्रीराम में मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाई थी। और उनकी पतंग उड़ते-उड़ते इंद्रलोक में जा पहुंची थी। जिसे देखकर सभी देवी-देवता प्रसन्न हुए। कहते हैं कि तभी से मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने की परंपरा चली आ रही है। जो आज तक कायम है।

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मकर संक्रांति की तरह स्वतंत्रता दिवस के दिन भी पतंग उड़ाने की परंपरा है। पतंग को खुशी, आजादी और शुभता का संकेत माना जाता है। इसलिए इन दिनों में पतंग उड़ाने से खुशी का संदेश जाता है।

वैज्ञानिक दृष्टि से बात करें, तो मकर संक्रांति के दिन सूर्य की किरण शरीर के लिए अमृत समान है, जो विभिन्न रोगों को दूर करने में सहायक होती है। इसलिए इस दिन पतंग उड़ाने से आप सूर्य की किरणों को अधिक मात्रा में ग्रहण करते हैं, जिससे आपके शरीर में विटामिन D की कमी पूरी होती है। इसके साथ ही विभिन्न तरह के रोगों से बचाव होता है।





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