अपनी याचिका में उद्धव ठाकरे ने स्पीकर के फैसले को सुप्रीम कोर्ट का अपमान बताया है और कहा है कि स्पीकर कोर्ट के फैसले को नहीं समझ सके। याचिका में कहा गया है कि यह मामला विधायकों की अयोग्यता का था, लेकिन स्पीकर ने अपने हिसाब से फैसला सुनाया है।

शिवसेना पर स्पीकर के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे उद्धव ठाकरे
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महाराष्ट्र में शिवसेना पर अधिकार की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उद्धव ठाकरे पार्टी पर अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। उन्होंने पार्टी के अधिकार पर महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर के फैसले को गलत करार देते हुए दावा किया है कि उनकी शिवसेना ही असली शिवसेना है। याचिका में कोर्ट से शिवसेना पर स्पीकर के फैसले को रद्द करने और उद्धव गुट को असली शिवसेना करार देने की अपील की गई है। कोर्ट में मामले की सुनवाई के लिए तारीख तय नहीं हुई है।

महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर और बीजेपी नेता राहुल नार्वेकर ने कई साल बाद हाल में अपना फैसला सुनाते हुए कहा था कि 22 जून, 2022 को पार्टी के भीतर प्रतिद्वंद्वी गुट उभरने पर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाला गुट ही असली शिवसेना है। स्पीकर ने शिंदे और उद्धव के नेतृत्व वाले दोनों गुटों के किसी भी सदस्य को अयोग्य ठहराने से भी इनकार कर दिया था। उद्धव गुट ने स्पीकर से शिंदे गुट के 16 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की थी, जिसे स्पीकर ने खारिज कर दिया।

स्पीकर राहुल नार्वेकर ने माना था कि बगावत के समय एकनाथ शिंदे गुट को पार्टी के 54 विधायकों में से 37 विधायकों का समर्थन था। बीते साल चुनाव आयोग ने अपने एक फैसले में पार्टी के नाम और चिन्ह पर शिंदे गुट का अधिकार माना था। सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में उद्धव ठाकरे ने स्पीकर के फैसले को सुप्रीम कोर्ट का अपमान बताया है और कहा है कि स्पीकर कोर्ट के फैसले को नहीं समझ सके। याचिका में कहा गया है कि यह मामला विधायकों की अयोग्यता का था, लेकिन स्पीकर ने अपने हिसाब से फैसला सुनाया है।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में खासा प्रभाव रखने वाली शिवसेना को बालासाहेब ठाकरे ने बनाया था। राज्य में 2022 में शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस की एमवीए सरकार के दौरान उद्धव के करीबी रहे एकनाथ शिंदे कई विधायकों और सांसदों को लेकर बीजेपी शासित असम के होटल चले गए थे। कई दिन की रस्साकशी के बाद विधायकों के साथ मुंबई लौटे शिंदे ने शिवसेना पर दावा कर दिया और उद्धव ठाकरे को पार्टी से बेदखल करने की भी कोशिश की। इसी दौरान एकनाथ शिंदे ने बीजेपी के साथ मिलकर राज्य में सरकार बना ली और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन गए।


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