दूसरी तरफ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने न सिर्फ शब्दों की मर्यादा का ध्यान रखा बल्कि अपने आचरण से भी लोगों के बीच जाकर सिर्फ काम के आधार पर वोट मांगा। उन्होंने राजस्थान में कांग्रेस सरकार द्वारा शुरु की गई कल्याणकारी योजनाएं गिनाईं। इससे चिढ़े बीजेपी नेताओं ने कहना शुरु किया कि इन दोनों के बीच तो अनबन रहती है और वे साथ में काम नहीं कर सकते। प्रधानमंत्री तो एक कदम आगे बढ़ गए और उन्होंने यहां तक कह दिया कि गूर्जरों का अपमान करते हुए कांग्रेस ने स्वर्गीय राजेश पायलट को वह मुकाम पर नहीं पहुंचने दिया जिसके वह हकदार थे।

मतदाताओं को अब 25 नवंबर शनिवार को अपना फैसला देना है। मतदाताओं को चुनना है सांप्रदायिकता और कल्याणकारी योजनाएं में से, उन्हें चुनना है काम करने वाले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नरेंद्र मोदी में से जो सिर्फ और सिर्फ अपना ही गुणगान करते रहे।

लेकिन प्रचार के आखिरी दिन अशोक गहलोत ने एक शानदार किस्सा सुना दिया। उन्होंने कहा कि जब वे गुजरात में कांग्रेस के लिए प्रचार कर रहे थे तो प्रधानमंत्री कहते फिर रहे थे कि एक मारवाड़ी आ गया है राजस्थान से उन्हें हराने, मैं तो गुजराती हूं, अगर वह जीत गया को मैं कहा जाऊंगा…गहलोत ने कहा कि क्या अब मैं भी उन्हीं के अंदाज़ में कहूं कि दो गुजराती आ गए हैं राजस्थान में, अगर वे जीत गए तो मैं तो आपके बीच का हूं, राजस्थान का हूं. मैं कहां जाऊंगा….।

वोटों की गिनती 3 दिसंबर को होनी है, तो स्पष्ट हो जाएगा कि राजस्थान में किसकी जीत होती है।



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