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लालू प्रसाद यादव का कहना है कि नेता तो अपनी वफादारी बदल सकते हैं लेकिन 2024 में लोगों के ऐसा करने की कोई संभावना नहीं। यह पूछे जाने पर कि कई नेताओं के ‘इंडिया’ गठबंधन को छोड़कर भाजपाबीजेपी का दामन थामने का क्या असर पड़ने जा रहा है, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) नेता ने फौरन कहा, ‘इससे कोई फर्क नहीं पड़ने जा रहा क्योंकि लोग मोदी सरकार से नाराज हैं और वे कहीं भी शिफ्ट नहीं होने जा रहे। नेता इधर-उधर जाते रहते हैं।’

वह कहते हैं कि ‘देश के गरीब अभूतपूर्व महंगाई झेल रहे हैं। उनके मौलिक अधिकारों और उनकी आवाज का गला घोंटा जा रहा है। पिछड़े वर्गों के अलावा गरीबों, युवाओं, दलितों और अल्पसंख्यकों पर अब तक की सबसे भयानक क्रूरता की जा रही है। एक राजनीतिक दल के तौर पर, जब लोग अपने जीवन के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हों, तो उनसे जुड़े मुद्दों को छोड़ना सबसे बड़ा पाप है।’

बिहार में नीतीश कुमार, उत्तर प्रदेश में जयंत चौधरी और महाराष्ट्र में अशोक चव्हाण के बीजेपी के पाले में चले जाने के बाद राजद अध्यक्ष पहली बार इस लेखक से खास तौर पर बात कर रहे थे।

नीतीश कुमार के बीजेपी का दामन थामने, जिसके कारण राज्य में महागठबंधन सरकार गिर गई, पर उन्होंने कहा, ‘वह आदतन भगोड़ा है। अपनी आदत से लाचार है। लोगों ने उसे पहचान लिया है; वे उसे भारी दंड देंगे।’ लालू यादव ने कहा, ‘यह विपक्षी दलों और नेताओं का कर्तव्य है कि जब लोग अत्याचार और उत्पीड़न के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हों, तो उनके मुद्दों के लिए खड़े हों। मैंने सांप्रदायिक और दमनकारी ताकतों के साथ कभी समझौता नहीं किया है और न कभी करूंगा, चाहे वे (बीजेपी) मेरे सामने कितनी भी चुनौती पेश करें।’

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