गौरतलब है कि तेलंगाना के लगभग हर जिले में बड़ी तादाद में मुस्लिम मतदाता हैं, लेकिन खासतौर से हैदराबाद, रंगारेड्डी, महबूबनगर, नालगोंडा, मेडक, निजामाबाद और करीमनगर में एक तरह से मुस्लिम वोटर निर्णायक साबित हुए हैं।

मुस्लिम मतदाताओं के कांग्रेस की तरफ झुकाव पर वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक टी एस सुधीर कहते हैं कि, “अल्पसंख्यकों में हैदराबाद के बाहर भी यह विमर्श था कि कर्नाटक की तरह कांग्रेस को तेलंगाना में भी एक मौका दिया जाना चाहिए। इसके अलावा यह चर्चा भी आम थी कि केसीआर जरूरत पड़ने पर बीजेपी के साथ हाथ मिला सकते हैं। उनके इस शक को मोदी ने अपनी रैली में यह कहकर पुख्ता कर दिया था कि केसीआर ने एनडीए में शामिल होने की इच्छा जताई थी। वहीं कांग्रेस का यह नैरेटिव की एआईएमआईएम और बीआरएस दोनों ही बीजेपी के नजदीक हैं, इसका भी खासा असर रहा।”

वहीं कर्नाटक के चिकित्सा शिक्षा मंत्री शरण प्रकाश पाटिल का कहना है कि उन्होंने वोटरों को यह समझाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी कि जिस तरह कर्नाटक में कांग्रेस की गारंटियों को लागू किया गया है, तेलंगाना में भी पहले दिन से इन गारंटियों को लागू करने की प्रक्रिया शुरु कर दी जाएगी।

तेलंगाना के लिए कांग्रेस प्रभारी महासचिव मंसूर अली खान का कहना है कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा ने कांग्रेस के पुनर्जन्म की जमीन तैयार की थी। इसके अलावा कर्नाटक में कांग्रेस की जीत से इस जमीन को मजूबती मिली।



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