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शर्मिला के पति अनिल कुमार ईसाई मत प्रचारक हैं। उनके समर्थकों की राज्य में अच्छी-खासी संख्या है। वह भी छोटी-छोटी सभाओं में अपनी पत्नी के लिए समर्थन जुटा रहे हैं। हाल में इलुरु शहर में उन्होंने कहा कि ‘शक्तिशाली को हराने के लिए परमात्मा कमजोर को चुनता है। वह परमात्मा के साम्राज्य को धरती पर लाने के लिए धरती पर किसी को भेजेगा।’ कुमार का जन्म धर्मनिष्ठ ब्राह्मण परिवार में हुआ। 1995 में शर्मिला के साथ शादी के बाद उन्होंने ईसाईयत ग्रहण कर लिया और पेस्टर बन गए।

जगन खुद भी धर्मनिष्ठ ईसाई हैं। पर सार्वजनिक रैलियों में वह धार्मिक कार्ड नहीं खेलते रहे हैं। यह काम उन्होंने अपने चाचा और धर्म प्रचारक विमल रेड्डी पर छोड़ रखा है। विमल रेड्डी ने एक सभा में कहा भी, ‘हमें सुनिश्चित करना चाहिए कि जगन रेड्डी सत्ता में लौटें। अन्यथा न तो ईसाई सुरक्षित रहेंगे और न ही उनकी अपनी धार्मिक स्वतंत्रता रहेगी।’

ईसाई समुदाय वाईएसआर परिवार का पारंपरिक समर्थक माना जाता रहा है। 2011 जनगणना के अनुसार, ईसाईयों की संख्या राज्य में 2 प्रतिशत से भी कम है, पर वास्तविक संख्या इससे ज्यादा मानी जाती है। राजनीतिक विश्लेषक और लेखक के रमेश बाबू कहते हैं कि ‘यह बात ध्यान में रखने की है कि आंध्र प्रदेश में धर्मपरिवर्तन कर ईसाई बने लोग अपनी हिन्दू पहचान बनाए रखना बेहतर मानते हैं और वे दशकों पुरानी परंपराएं मानते हैं। वे अपने धर्म में औपचारिक और सरकारी तौर पर बदलाव की जरूरत नहीं महसूस करते।’

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