जैसे-जैसे समय बीतता है और महिलाओं की उम्र बढ़ती है, उनके शरीर में आयरन की ज़रूरतें बदल जाती हैं। महिलाओं को प्रसव, पीरियड के दौरान खून में खोए गए आयरन की मात्रा को पूरा करने के लिए प्रचुर मात्रा में आयरन की आवश्यकता होती है। मेनोपॉज के बाद पीरियड खत्म हो जाते है इसलिए खून का नुकसान भी कम होता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आयरन की आवश्यकता भी खत्म हो जाती है। वास्तव में उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं को और भी ज्यादा आयरन (Iron for women) की जरूरत पड़ने लगती है।


इडनबर्ग की एक यूनिवर्सिटी ने दावा किया है कि रक्त में आयरन के स्वस्थ स्तर को बनाए रखना एजिंग के लक्षणों के कम करने और लंबे समय तक जीवित रहने की कुंजी हो सकता है।

इस बारे में ज्यादा जानने के लिए हमने बात की डॉ. रितु सेठी से। डॉ. रितु सेठी प्रसूति रोग विशेषज्ञ एवं लेप्रोस्कोपिक सर्जन है औक, ऑरा स्पेशलिटी क्लिनिक, गुड़गांव में निदेशक है।

डॉ. रितु सेठी बताती है कि आयरन, एक आवश्यक खनिज, महिलाओं के स्वास्थ्य और समग्र कल्याण को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि यह दोनों लिंगों के लिए महत्वपूर्ण है, पीरियड, गर्भावस्था और स्तनपान जैसे कारकों के कारण महिलाओं को आयरन की विशिष्ट आवश्यकता होती है।

गर्भावस्था के दौरान, बढ़ते भ्रूण के विकास के लिए एक महिला के रक्त की मात्रा बढ़ जाती है। चित्र : शटरस्टॉक

किन कारणों से होती है महिलाओं को ज्यादा आयरन की आवश्यकता

रक्त को स्वस्थ बनाने के लिए

आयरन हीमोग्लोबिन का एक प्रमुख घटक है, लाल रक्त कोशिकाओं में एक प्रोटीन जो फेफड़ों से शरीर के सभी हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए जिम्मेदार होता है। पर्याप्त आयरन के बिना, महिलाओं में आयरन की कमी से एनीमिया विकसित हो सकता है, जिससे थकान, कमजोरी और प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो सकती है।


मेंस्ट्रुएशन

महिलाओं को हर महीने पीरियड के दौरान काफी मात्रा में खुन खोना पड़ता है। इससे आयरन की कमी भी हो सकती है, जिससे महिलाओं के लिए इसकी आपूर्ति को पूरा करने और एनीमिया को रोकने के लिए पर्याप्त आयरन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करना महत्वपूर्ण हो जाता है।

गर्भावस्था के कारण

गर्भावस्था के दौरान, बढ़ते भ्रूण के विकास के लिए एक महिला के रक्त की मात्रा बढ़ जाती है। इस प्रक्रिया के लिए आयरन महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मां और विकासशील बच्चे दोनों को पर्याप्त ऑक्सीजन सुनिश्चित करने के लिए अधिक लाल रक्त कोशिकाओं का उत्पादन करने में मदद करता है। गर्भावस्था के दौरान आयरन की कमी से बच्चे का जन्म समय से पहले और बत्ते का जन्म कम रह सकता है।

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ऑस्टियोपोरोसिस जिसमें हड्डियां कमजोर होती है, उम्र बढ़ने के साथ कई महिलाओं की हड्डियां कमजोर हो सकती है। चित्र:शटरस्टॉक

स्तनपान

बच्चे को जन्म देने के बाद, जो महिलाएं स्तनपान कराती हैं उनमें आयरन की आवश्यकता बढ़ जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बच्चे का बढ़ना और विकास में सहायता के लिए आयरन को स्तन के दूध में स्थानांतरित किया जाता है। माँ और बच्चे दोनों में आयरन की कमी से बचने के लिए पर्याप्त आयरन का सेवन आवश्यक है।

हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए

ऑस्टियोपोरोसिस जिसमें हड्डियां कमजोर होती है, उम्र बढ़ने के साथ कई महिलाओं की हड्डियां कमजोर हो सकती है । आयरन से शरीर में कोलेजन के उत्पादन में मदद मिल सकती है जिससे हड्डियों को मजबूत किया जा सकता है। आयरन के भरपूर मात्रा में सेवन से आपकी हड्डियों को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

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