“तनाव” यानी “स्ट्रेस” एक सामान्य शब्द है, जिसे लोग आजकल अपनी मानसिक स्थिति बताने के लिए इस्तेमाल करते हैं। स्ट्रेस चाहें जितना छोटा और आम शब्द बन जाए, परंतु यह बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। तनाव की वजह से न केवल मानसिक स्थिति प्रभावित होती है, बल्कि यह तमाम गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। स्ट्रेस के कारण शरीर में कई सारे हार्मोनल बदलाव होते हैं, जो शरीर के लिए अंदरुनी रूप से परेशानियां खड़ी कर देते हैं।

अब आप सोच रही होगी आखिर स्ट्रेस किस तरह स्वास्थ्य समस्याओं को ट्रिगर कर सकता है (stress and disease), आपके इसी सवाल का जवाब देने के लिए हेल्थ शॉट्स ने इस विषय पर तुलसी हेल्थ केयर, न्यू दिल्ली के सीनियर कंसल्टेंट साइकैटरिस्ट, डॉक्टर गौरव गुप्ता से बात की।

डॉक्टर गौरव ने तनाव के कारण होने वाली बीमारियों के बारे में बताया है। तो चलिए जानते हैं, तनाव आखिर किस तरह हमारे लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

जानें किन स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है तनाव (stress and disease)

1. स्ट्रेस और हार्ट डिजीज

तनाव की स्थिति में आपका शरीर इसके नकारात्मक प्रभाव को आप पर हावी होने से बचाने के लिए रिस्पांस करता है, परंतु यदि बॉडी लंबे समय तक इसी तरह से रिस्पांस करती रही तो इससे आपके शरीर को तमाम नुकसान हो सकते हैं। तनाव में बॉडी कॉर्टिसोल नामक हार्मोन रिलीज करती है, इस पर कई स्टडी की गई उन सभी में पाया गया की लंबे समय तक तनावग्रस्त रहने से बॉडी में कॉर्टिसोल के स्तर के बढ़ने से ब्लड कोलेस्ट्रॉल लेवल, ट्राइग्लिसराइड, ब्लड शुगर का स्तर सहित ब्लड प्रेशर को बढ़ जाता है। यस यह सभी फैक्टर हृदय संबंधी समस्या का एक सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा स्ट्रेस आर्टिरीज में plaque के जमाव का कारण बनता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है।

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यदि आपको कुछ समय के लिए स्ट्रेस होता है, जैसे कि आप किसी बात से अधिक चिंतित हो जाती हैं, तो यह स्थिति भी आपके हार्ट को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में हार्ट मसल्स में ब्लड फ्लो धीमा हो जाता है। इस कंडीशन में हार्ट को पर्याप्त मात्रा में ब्लड और ऑक्सीजन नहीं मिल पाता, जिसकी वजह से परेशानी हो सकती है। तनाव ब्लड क्लॉट्स का भी कारण बन सकता है।

यदि आप अधिक तनाव में हैं, तो फौरन इस पर काम शुरू करें। यदि आपको खुद से स्थिति को संभालने में परेशानी आ रही है, तो मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से मिलें। इसके अलावा किसी भी तरह की हृदय संबंधी समस्या महसूस होने पर इसके गंभीर होने का इंतजार न करें और कार्डियोलॉजिस्ट को जरूर दिखाएं।

ऐसा विकार जहां शरीर में कोशिकाएं इंसुलिन पर प्रतिक्रिया नहीं करती हैं जैसा उन्हें करना चाहिए। चित्र: अडोबी स्टॉक

2. स्ट्रेस और डायबिटीज

हालांकि, तनाव सीधे तौर पर डायबिटीज का कारण नहीं बनता है, लेकिन यह टाइप 2 डायबिटीज के विकास में योगदान दे सकता है।

इन्फ्लेमेशन: लंबे समय तक तनाव शरीर की सूजन प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने की क्षमता में हस्तक्षेप कर सकता है। डायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस दो ऐसी स्वास्थ्य समस्याएं हैं, जो सूजन से जुड़ी होती हैं। लंबे समय से चले आ रहे तनाव से वजन बढ़ाने की समस्या एक आम दुष्प्रभाव है, खासकर पेट के क्षेत्र में। इंसुलिन रेजिस्टेंस, टाइप 2 डायबिटीज और पेट की अतिरिक्त चर्बी एक दूसरे से जुड़े हैं।

हार्मोनल बदलाव: तनाव के कारण शरीर कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे केमिकल्स को रिलीज करता है। इन हार्मोनों के परिणामस्वरूप ब्लड शुगर का स्तर तेजी से बढ़ सकता है। समय के साथ रक्त शर्करा का उच्च स्तर इंसुलिन प्रतिरोध का कारण बन सकता है, एक ऐसा विकार जहां शरीर में कोशिकाएं इंसुलिन पर प्रतिक्रिया नहीं करती हैं जैसा उन्हें करना चाहिए। टाइप 2 डायबिटीज की शुरुआत में एक प्रमुख योगदान कारक इंसुलिन
रेजिस्टेंस है।

ऐसे कई कारक हैं, जो डायबिटीज के विकास में योगदान करते हैं, तनाव उनमें से एक है। मधुमेह का जोखिम जीवनशैली, आहार, आनुवंशिकी और सामान्य स्वास्थ्य से भी काफी प्रभावित होता है। अच्छी जीवनशैली, व्यायाम, विश्राम तकनीक और दूसरों के समर्थन से प्रबंधित होने पर तनाव संभावित रूप से डायबिटीज के खतरे को कम कर सकता है।

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बन सकते हैं वेट गेन का कारण। चित्र : एडॉबीस्टॉक

3. स्ट्रेस और वेट गेन

कॉर्टिसोल फैट और कार्बोहाइड्रेट मेटाबॉलिज्म को स्टिम्युलेट करता है और यह शरीर में ऊर्जा का वितरण करता है। यह प्रक्रिया किसी भी व्यक्ति के सर्वाइवल करने के लिए बेहद जरूरी है, वहीं यह साथ-साथ भूख को भी अत्यधिक उत्तेजित कर देती है। तनाव की स्थिति में बॉडी अत्यधिक मात्रा में कॉर्टिसोल रिलीज करता है, जिसकी वजह से मीठा, फैटी और साल्टी फूड्स खाने की क्रेविंग्स बढ़ जाती है। ऐसे में आप जंक और फास्ट फूड का अत्यधिक सेवन करती हैं, जो आपके शरीर में फैट स्टोरेज का कारण बन सकता है।

इसके साथ ही शरीर में कॉर्टिसोल के बढ़ते स्तर से बॉडी टेस्टोस्टरॉन प्रोड्यूस करती है। यह मसल मास के कम होने का कारण बन सकता है, साथ ही इस स्थिति में आपकी नियमित कैलोरी बर्न करने की क्षमता भी कम हो जाती है।

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