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दूध को संपूर्ण आहार कहा जाता है, यानी यह बहुत सारे पोषक तत्वों का भंडार है। मगर कुछ लोग खाना खाने के साथ दूध पीना पसंद करते हैं, तो कुछ लोग ब्रेकफास्ट में दूध पीते हैं। जानिए क्या है दूध पीने का सबसे सही समय और तरीका।

कैल्शियम सहित कई अन्य महत्वपूर्ण विटामिन और मिनरल से भरपूर दूध सेहत के लिए कई रूपों में फायदेमंद होते हैं। परंतु आपको जानकर हैरानी होगी कि दूध पीना भी आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। कई ऐसी स्थिति है, जहां दूध पीना सेहत के लिए हेल्दी नहीं होता, साथ ही दूध पीने का तरीका और समय भी इसकी स्वास्थ्य गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ लोग खाना खाते समय खुद को और अपने बच्चों को दूध देते हैं। क्या आपने कभी जानने की कोशिश की है, दूध और मिल का कांबिनेशन आपकी सेहत के लिए उचित है या नहीं? यदि नहीं तो आपको इस बारे में जानना चाहिए।

हेल्थ शॉट्स ने इस बारे में अधिक जानने के लिए न्यूट्रीफाई बाय पूनम डायट एंड वैलनेस क्लिनिक एंड अकादमी की डायरेक्टर पूनम दुनेजा से बात की। न्यूट्रीशनिस्ट ने खाना खाते हुए दूध पीने के कुछ नकारात्मक प्रभाव बताए हैं। तो चलिए जानते हैं दूध पीने का सही समय क्या है।

जानें इस पर क्या कहती हैं एक्सपर्ट

पूनम दुनेजा के अनुसार “खाने के साथ दूध पीने से बॉडी में कई नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। खासकर इससे पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है, जैसे कि पेट दर्द, जी मचलना, अपच, गैस, ब्लोटिंग, अल्सर, बदबू, कब्ज, एसिड रिफ्लक्स आदि इसके अलावा यह स्किन डिसऑर्डर का भी कारण बन सकता है।”

“खाने के साथ दूध लेना सेहत के लिए कई रूपों में हानिकारक हो सकता है। दूध को हमेशा सेपरेटली पीने की सलाह दी जाती है। खासकर इसे बेड टाइम यानी की रात को सोने से पहले पीना चाहिए। यह डाइजेशन प्रोसेस को धीमा कर देता है, ताकि आप लंबे समय तक संतुष्ट रहे और आपको बार-बार भूख न लगे। साथ ही यह मसल्स के रिकवरी में भी मदद करता है और बॉडी में सेरोटोनिन के उत्पादन को बढ़ावा देता है।

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ब्लोटिंग और डायरिया जैसी समस्याएं व्यक्ति को परेशान कर सकती हैं। चित्र:एडॉबीस्टॉक

सेरोटोनिन एक प्रकार का हार्मोन है, जो बॉडी में आराम की भावना को बढ़ावा देता है, जिससे कि एक बेहतर नींद प्राप्त होती है। साथ ही यह नींद की गुणवत्ता के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।”

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जानें किन्हें नहीं पीना चाहिए दूध

कुछ लोगों को दूध से परहेज रखने की सलाह दी जाती है, वहीं यदि वे दूध पीना चाहते हैं, तो उन्हें एक सीमित मात्रा में दूध लेना चाहिए। वैसे लोग जो लेक्टोज इनटोलरेंस हैं या फिर जिन्हें दूध से एलर्जी है, उन्हें इससे पूरी तरह परहेज करना चाहिए। लेक्टोज इनटोलरेंस की स्थिति में बॉडी दूध में मौजूद लैक्टोज शुगर को डाइजेस्ट नहीं कर पाती, जिसकी वजह से ब्लोटिंग और डायरिया जैसी समस्याएं व्यक्ति को परेशान कर सकती हैं।

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इसके अलावा डायबिटीज और ब्लड शुगर कंट्रोल नहीं कर पाने वाले लोगों को नियमित रूप से दूध नहीं पीना चाहिए, उन्हें एनिमल बेस्ड मिल्क की जगह प्लांट बेस्ड मिल्क जैसे कि आलमंड, कैसियो, हेंप मिल्क को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। डायबिटीज के मरीजों को दूध में किसी प्रकार के एडिटिवस और शुगर ऐड नहीं करने चाहिए।

जानें दूध पीने का सही तरीका

दूध पीने की सही तरीके की बात करें तो पूरे दिन में एक गिलास दूध काफी है। इसके अलावा बहुत से लोगों का सवाल रहता है कि दूध को ठंडा या गुनगुना पीना चाहिए! तो आपको बताएं कि ठंडा दूध डिहाईड्रेशन और एसिडिटी की स्थिति में फायदेमंद होता है। दूध में मौजूद इलेक्ट्रोलाइट आपकी बॉडी को सुपर चार्ज कर देते हैं, और मेटाबॉलिज्म को भी इंप्रूव करते हैं। वहीं दूसरी ओर गुनगुने दूध को मांसपेशियों को रिपेयर करने के लिए फायदेमंद माना जाता है।

इसके अलावा दूध को हमेशा बिना किसी एडिटिव के डाइट में शामिल करना चाहिए। यह अधिक ब्रभवी होता है। यदि आप चाहे तो इसमें दो चुटकी हल्दी या दालचीनी पाउडर ऐड कर सकती हैं। परंतु मार्केट में मिलने वाली एनर्जी पाउडर प्रोटीन पाउडर आदि जैसी चीजों को ऐड करने से इसकी गुणवत्ता प्रभावित होती है।

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कच्चे दूध का सेवन सेहत के लिए हानिकारक। चित्र- शटर स्टॉक

अब जानें दूध पीने का सही समय क्या है

क्या आपने कभी सोचा है कि दूध पीने का सही समय क्या है? यदि नहीं तो आपको इसके बारे में मालूम होना चाहिए। मिल्क शरीर के लिए सुपर हीरो की तरह काम करता है, परंतु यदि इसे सही समय और सही तरीके से न लिया जाए तो यह सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। रात को सोने से पहले दूध पीना सबसे अच्छा आईडिया है। दूध और खाने के बीच में हमेशा 2 घंटे का गैप रखें। यदि आप डिनर के बाद दूध ले रहे हैं, तो 8:00 बजे डिनर करें और 10:00 बजे दूध पिएं। ऐसा करने से आप उसकी सभी गुणवत्ता का फायदा उठा पाएंगी। दूध में ट्राइप्टोफैन और अमीनो एसिड की मात्रा पाई जाती है जो सेरोटोनिन और मेलाटोनिन के प्रोडक्शन में मदद करते हैं।

यह दो ऐसे हार्मोन है, जो नींद की गुणवत्ता पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। जिससे की रात को बेहतर नींद प्राप्त करने में मदद मिलती है। इसके अलावा दूध में कैल्शियम की मात्रा पाई जाती है, जो हड्डियों की सेहत को बढ़ावा देने के साथ ही समग्र सेहत के लिए फायदेमंद होती हैं। वहीं रात को यह पोषक तत्व आराम से बॉडी में अवशोषित हो पाते हैं और शरीर पर अपना एक उचित प्रभाव छोड़ते हैं।

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