Picture:FILE डेल्टा कॉर्प

ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ी कंपनी डेल्टा कॉर्प को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) विभाग से 6,384 करोड़ रुपये के कर भुगतान का नोटिस मिला है। हालांकि, कंपनी ने इस Tax डिमांड को मनमाना और कानून के खिलाफ बताते हुए कहा है कि वह इसे चुनौती देने के लिए सभी कानूनी तरीके अपनाएगी। कंपनी ने कहा कि नोटिस में डेल्टाटेक गेमिंग को कर भुगतान में कथित कमी को ब्याज एवं जुर्माने के साथ चुकाने की सलाह दी गई है। ऐसा न करने पर कंपनी को एक कारण बताओ नोटिस भेजे जाने की बात भी कही गई है। नोटिस के मुताबिक, डेल्टाटेक गेमिंग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक को रोजमर्रा के कार्यों के लिए जवाबदेह होने से उनपर जीएसटी कानून के तहत जुर्माना लगाने का जिक्र भी किया गया है। 

टैक्स देनदारी बढ़कर 23 हजार करोड़ हुई

इसके साथ ही कंपनी पर कुल कर मांग बढ़कर 23,000 करोड़ रुपये हो गई है। डेल्टा कॉर्प ने शेयर बाजार को दी गई सूचना में कहा है कि जीएसटी आसूचना महानिदेशालय (डीजीजीआई), कोलकाता ने उसकी अनुषंगी डेल्टाटेक गेमिंग को 13 अक्टूबर को कर मांग का नोटिस भेजा है। इस नोटिस में कंपनी से जनवरी, 2018 से लेकर नवंबर, 2022 की अवधि के लिए 6,236.8 करोड़ रुपये का जीएसटी चुकाने को कहा गया है। इसके साथ ही जुलाई, 2017 से अक्टूबर, 2022 की अवधि के लिए 147.5 करोड़ रुपये की एक अन्य कर मांग भी की गई है। डेल्टा कॉर्प को जीएसटी विभाग से एक और नोटिस मिलने की खबर आते ही इसके शेयर के भाव में बड़ी गिरावट आई। बीएसई पर डेल्टा कॉर्प का शेयर पिछले बंद भाव के मुकाबले 8.8 प्रतिशत की गिरावट के साथ 127.7 रुपये के भाव पर आ गया। 

ग्रॉस वैल्यू पर टैक्स डिमांड करना गलत 

डेल्टा कॉर्प का कहना है कि इस नोटिस में दावे वाली राशि संबंधित अवधि में खेले गए सभी गेम में लगाए गए दांव के ग्रॉस वैल्यू मूल्य पर आधारित है। कंपनी के मुताबिक, गेम में शामिल प्रतिभागियों से ली गई gross quantity के बजाय दांव पर लगाई गई राशि पर जीएसटी की मांग करना गेमिंग उद्योग से जुड़ी समस्या है और पहले ही उद्योग संगठन सरकार के समक्ष यह मुद्दा उठा चुका है। पिछले महीने भी डेल्टा ग्रुप को 16,800 करोड़ रुपये मूल्य का कर और चुकाने का एक कारण बताओ नोटिस भेजा गया था। अगस्त में जीएसटी परिषद की बैठक में ऑनलाइन गेमिंग एवं कसीनो कंपनियों पर लगाए गए दांव की सकल राशि पर 28 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाने पर सहमति जताई गई थी। उसके बाद ही जीएसटी विभाग ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों से कर भुगतान की मांग शुरू की है। 

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