Raghuram Rajan: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजादी के 100वें वर्ष में देश को विकसित बनाने का खाका हाल ही में लॉन्च किया है. विकसित भारत (Develop India) के लिए कई तरह की योजनाएं बनाने की कोशिश की जा रही है. इसी कड़ी में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन (Raghuram Rajan) ने कहा है कि भारत को 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा पर ध्यान देने की जरूरत है. 

शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवा में करने होंगे बड़े बदलाव 

रघुराम राजन ने शासन में सुधार, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवा में आमूलचूल परिवर्तन पर जोर दिया है. उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों में संतुलित विकास की आवश्यकता है. फिलहाल उच्च आय वर्ग के लोगों की उपभोग करने की क्षमता बहुत मजबूत हो गई है. इसलिए सरकार को ऐसी योजनाएं लाना चाहिए कि निम्न आय वर्ग के हाथों में भी खरीद की ताकत बढ़े. आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने शुक्रवार को कहा कि भारत को 2047 तक विकसित इकोनॉमी बनने के लिए सबसे ज्यादा ध्यान एजुकेशन और हेल्थ सेक्टर पर देना होगा. विकसित भारत 2047 का सपना पूरा करने की दिशा में यही सबसे महत्वपूर्ण कदम होगा.

गवर्नेंस रिफॉर्म भी बेहद जरूरी 

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, कोलकाता लिटरेरी मीट में बोलते हुए रघुराम राजन ने कहा कि भारत ने पिछले 25 साल से लगभग छह फीसदी की औसत विकास दर बनाए रखी है. यह किसी भी देश के लिए बड़ी उपलब्धि है. उन्होंने एक मजबूत नींव बनाने के लिए गवर्नेंस रिफॉर्म की आवश्यकता पर भी जोर दिया. आरबीआई के पूर्व गवर्नर ‘ब्रेकिंग द मोल्ड: रीइमेजिनिंग इंडियाज इकोनॉमिक फ्यूचर’ पुस्तक का विमोचन करने के लिए कोलकाता में थे. यह किताब उन्होंने अर्थशास्त्री रोहित लांबा के साथ मिलकर लिखी है.

7 फीसदी हो आर्थिक विकास दर

उन्होंने कहा कि यदि भारत 2047 तक एक विकसित देश बनना चाहता है तो उसे 7 फीसदी से अधिक की आर्थिक विकास दर हासिल करनी पड़ेगी. यदि भारत ने 7 फीसदी की विकास दर से तरक्की की तो देश की प्रति व्यक्ति आय मौजूदा 2400 डॉलर से बढ़कर 2047 में 10,000 डॉलर हो जाएगी. इससे देश निम्न मध्यम आय वर्ग की श्रेणी में पहुंच जाएगा. उन्होंने भारत के विकास के लिए भविष्य की दिशा निर्धारित करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि देश को फिलहाल जनसंख्या का लाभ है. यह 2050 के बाद कम होने लगेगा. राजन और लांबा ने भारत में हाई वैल्यू प्रोडक्ट बनाने और रिसर्च को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया.

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