बजट की चर्चा जोरों पर है. अब बस चंद दिनों की बात है, फिर भारत का नया बजट सामने आने वाला है. इस सप्ताह संसद के बजट सत्र की शुरुआत हो रही है. इस सत्र के दौरान इसी सप्ताह 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण नया बजट पेश करने वाली हैं.

चुनाव के कारण आएगा अंतरिम बजट

यह बजट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का लगातार छठा बजट होगा और इस तरह से वह मोरारजी देसाई की बराबरी करेंगी. चूंकि इस साल लोकसभा चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में यह पूर्ण बजट न होकर अंतरिम बजट होगा. जनवरी-फरवरी में संसद के बजट सत्र के बाद कभी भी लोकसभा चुनावों का ऐलान हो सकता है. मौजूदा लोकसभा का कार्यकाल मई में पूरा हो रहा है.

फरवरी की पहली तारीख को आता है बजट

लंबे समय से बजट फरवरी महीने में पेश होता आ रहा है. हालांकि मोदी सरकार के दौरान बजट पेश करने की तारीख बदल गई है. पहले बजट फरवरी महीने की अंतिम तारीख यानी 28 या 29 फरवरी को आता था. अब बजट फरवरी महीने की पहली तारीख यानी 1 फरवरी को पेश होता है. हर साल जनवरी से ही बजट की चर्चा शुरू हो जाती है. लोगों को बजट से उम्मीदें होती हैं. इसके साथ ही बजट से जुड़े अनोखे तथ्य भी निकलकर सामने आते हैं.

ये है बजट का शाब्दिक मतलब

बजट की इस तरह चर्चा में कई बार आपके मन में ये सवाल आया होगा कि आखिर इसका मतलब क्या है और यह शब्द आया कहां से… Price range अंग्रेजी का शब्द है और अंग्रेजी के कई अन्य प्रचलित शब्दों की तरह यह भी दूसरी भाषा से आया है. Price range बना है फ्रेंच के bougette शब्द से. Bougette बना है Bouge से, जिसका मतलब होता है चमड़े का ब्रीफकेस.

निर्मला सीतारमण ने की ब्रीफकेस की विदाई

भारत के बजट का स्वरूप अब भले ही बदल गया हो, लेकिन हाल-फिलहाल तक भारतीय बजट का चमड़े के ब्रीफकेस के साथ नाता बना हुआ था. वो तो जब निर्मला सीतारमण ने वित्त मंत्री बनने के बाद 2019 में अपना पहला बजट पेश किया तो ब्रीफकेस की विदाई हो गई. उन्होंने 2019 में पारंपरिक लाल ब्रीफकेस की जगह लाल बही-खाते में बजट पेश किया.

160 सालों में नहीं बदली बस ये एक चीज

भारतीय बजट का इतिहास 150 साल से भी ज्यादा पुराना है. 1857 की क्रांति के बाद जब ब्रिटिश सरकार ने भारत का प्रशासन ईस्ट इंडिया कंपनी से अपने हाथों में ले लिया था, उसके बाद 1860 में भारत का पहला बजट आया था. आजाद भारत में पहला बजट 26 नवंबर 1947 को आया था. दशकों पुराने हो चुके इस सफर में बजट में कई बदलाव हुए हैं. अब तो बजट पेपरलेस और डिजिटल भी हो चुका है. हालांकि इतने सालों में जो एक चीज नहीं बदली है, वह है बजट का मतलब. बजट का मतलब सरकार की कमाई और खर्च का लेखा-जोखा.

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