Wanting To Purchase Your First Home: अगर आप अपने सपनों का घर खरीदने का प्लान बना रहे हैं, और आप पहली बार अपनी प्रॉपर्टी खरीदने जा रहे हैं और साथ में आपको प्रॉपर्टी खरीदने का कोई अनुभव नहीं है, तो ये खबर आपके काम की साबित हो सकती हैं. आप इस बारे में अपने परिजनों से जरूर राय लेते होंगे, लेकिन सबकी बातें सुनकर भी आप फैसला नहीं कर पाते हैं, लोगों की बनावटी बातें आपको भ्रमित कर देती होंगी. ऐसे में आप इस खबर को देखकर अपने बजट का घर खरीदने में आसानी से फैसला कर सकते हैं.

जल्दबाजी में नहीं करें फैसला 

आप देश में कहीं भी घर खरीदने जा रहे हैं, तो आपको कुछ बेसिक बातें जरूर पता होनी चाहिए. आज के समय हर व्यक्ति नौकरीपेशा में हैं, उसे होम लोन आसानी में मिल जाता है, जिसके कारण वह अपने कामकाजी जीवन में काफी पहले ही घर खरीदने का प्लान बना रहा है. हालांकि इसमें कुछ गलत भी नहीं है. हर व्यक्ति का सपना उसे अपने जीवन में खुद का घर बनाने का होता हैं, जिसे वह अपना घर कह सके.

ये हैं सबसे बड़ी परेशानी 

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आज लोग अपने घर खरीदने के फैसले को जल्दी इसलिए भी ले लेते हैं, क्योंकि बैंक से होम लोन सस्ता मिल रहा है. होम लोन की दरें लगभग 6.5 प्रतिशत और कुछ जगह पर इससे भी कम में थी. ब्याज दर कम होने के कारण घर खरीदने में लोगों को इंट्रेस्ट आ रहा था. लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा नीतिगत दरों में बढोत्तरी के कारण अब होम लोन की दरें लगभग 8.5 प्रतिशत तक आ गई हैं. और ये आगे भी बढ़ने की संभावना है.

महंगी हो गई EMI

आप ऐसे समझ सकते हैं, जैसे आपने 20 साल के लिए 50 लाख रुपये का होम लोन 6.75 प्रतिशत ब्याज पर लिया था. इसमें आपको हर महीने 38,018 रुपये की ईएमआई देनी पड़ रही थी, आप कुल मिलकर 41-42 लाख रुपये का ब्याज सहित लोन चुकाते हैं. अब वही होम लोन 8.5 प्रतिशत पर पहुंच गया हैं, जिसके बाद आपको हर महीने 43,491 रुपये की ईएमआई क़िस्त के रूप में देनी होगी, और आप लगभग 54-55 लाख रुपये ब्याज के तौर पर जमा करेंगे. 

ऐसे ले फैसला, आप घर खरीदने के लिए तैयार हैं या नहीं 

आपके घर खरीदने का फैसला मुख्य रूप से दो तरीकों पर निर्भर है, जिसे आप बड़ी सावधानी के साथ ले सकते है, साथ ही आप ऐसे समझ सकते हैं. 

  1. आप कितना डाउन पेमेंट दें सकते हैं?
  2. आप कितनी ईएमआई हर महीने निकाल सकते हैं?

क्या हैं डाउन पेमेंट

जब आप होम लोन लेने जाते है, तो आप अपनी तरफ से 20 प्रतिशत निवेश प्रॉपर्टी में करते हैं. बाकि 80 फीसदी पैसा बैंक आपको होम लोन के जरिये देता है, और ब्याज सहित वसूलता है. अगर आप 75 लाख रुपये में घर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपको अपनी तरफ से 15 लाख रुपये (20 प्रतिशत) की व्यवस्था करनी होगी. इसका मतलब है कि भले ही आप घर खरीदने के लिए किसी सामाजिक दबाव में हों, फिर भी आपको कहीं से भी पैसे लाने की जरूरत है. मान लो आप 15 लाख रुपये की व्यवस्था नहीं कर पाते हैं, आपके पास सिर्फ 12 लाख रुपये हैं, तो बैंक आपको केवल 48 लाख रुपये होम लोन के रूप में देगा. इसलिए, आपका होम लोन बजट 60 लाख रुपये होना चाहिए (न कि 75 लाख रुपये जो आप चाह रहे हैं).

ईएमआई की क्षमता

आपको घर खरीदने के लिए लोन लेना पड़ता है. इससे पहले आपको इसका फैसला करना होगा कि आप हर महीने कितने रुपए ईएमआई के रूप में निकाल सकते हैं. आपको इसका आकलन जरूर करना चाहिए. इसमें आप अपनी मासिक आय का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा ही क़िस्त में दे सकते हैं. अगर आपकी आय 80,000 रुपये महीना है, और आप 75 लाख रुपये के घर के लिए 20 प्रतिशत यानि 15 लाख रुपये डाउन पेमेंट के लिए जमा कर सकते हैं. तब आपको 40 प्रतिशत ईएमआई यानि 32,000 रुपये प्रति महीना देना होगा. अब अगर आपने 20 साल के लिए होम लोन 8 प्रतिशत ब्याज पर लिया है, तो 32,000 रुपये मासिक क़िस्त ईएमआई देनी होगी, जिसमें आपको होम लोन 39-40 लाख रुपये मिल सकता है. यह 40 लाख रुपये का लोन और आपका 15 लाख रुपये का डाउन पेमेंट अब भी 75 लाख रुपये के घर के लिए पर्याप्त नहीं है. 

ये है विकल्प, ऐसे करें काम 

आपको घर खरीदने के लिए सबसे पहले कुछ विकल्प मिलते हैं, उसे समझ लेना चाहिए. इसमें आपको डाउन पेमेंट और कम दाम वाले घर, या अपने बजट के घर को देखना होगा. कई मौको पर देखा गया है, पति-पत्नी दोनों ही नौकरीपेशा में हैं तो दोनों मिलकर होम लोन लेकर इस परेशानी से निकल जाते हैं. अपनी लोन फाइल को और मजबूत करने के लिए जॉइंट लोन ले रहे हैं. इस मामले के लिए ये एक सही और सटीक तरीका है.

इन बातों का रखें ध्यान 

  • डाउन पेमेंट के लिए अपनी सारी बचत का उपयोग कभी नहीं करें. आपके पास आपात स्थिति के लिए हमेशा कुछ पैसे अलग से होना चाहिए. आप क्या करेंगे जब आपको अचानक से किसी खर्च के लिए पैसे की जरूरत पड़ जाए और आप पहले ही घर के डाउन पेमेंट के लिए सब कुछ खर्च कर चुके हैं?
  • अगर आप अस्थायी रूप से अपनी नौकरी खो देते हैं, तब आप क्या करेंगे? आपकी आमदनी रुक जाएगी, लेकिन ईएमआई नहीं रुकेगी. ऐसे में आपको बचत जरूर करनी चाहिए.
  • यदि आप एक निर्माणाधीन घर खरीदने जा रहे हैं, तो आपको न केवल ईएमआई का हिसाब देना होगा, बल्कि उस किराए का हिसाब देना होगा जो आप घर का कब्जा मिलने तक चुकाते रहेंगे. 

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